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Thursday, October 2, 2008

बुंदेलखण्ड के मौसम पर भी रहेगी ईसरो की नजर

कभी सूखे की मार तो कभी अतिवृष्टि का शिकार होने वाले बुंदेलखण्ड के मौस का मिजाज अब पहले की तरह अबूझ नहीं बना रहेगा। अब बुंदेलखण्ड के मौसम पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की पल-पल नजर रहेगी।

सागर के डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के परिसर मे शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन व मप्र विज्ञान तकनीकी परिषद के सहयो से अत्याधुनिक ''ऑटोमेटिक वेदर फॉरकास्टिंग सिस्टम'' स्थापित हो गया है। इस संयत्र का संबंध सीधे इसरो के उपग्रह से रहेगा। जिससे यहां के मौसम के हर बदलाव की खबर इसरो व भारत के मौसम विभाग के दिल्ली स्थित मुख्यालय को तुरंत लग जाएगी सागर मे इस परियोजना के निदेशक प्रो० अरूण शांडिल्य ने बताया कि मौसम का हाल बताने वाले ढाई--तीन लाख की कीमत के इस स्वचालित यंत्र को इसरों द्वारा नि-शुल्क प्रदान किया गया है। देश भर के मौसम के हाल की ठीक-ठाक जानकारी हासिल करने के लिए वर्ष 2008-09 मे इसरो देश भर मे ऐसे 1000 संयत्र लगा रहा है। इन संयत्रों की सबसे खास बात यह है कि बिजली नहीं होने पर ये बैटरी व सौर ऊर्जा से भी संचालित हो सकते हैं।
इसरो अपने इंसेट-2ई, कल्पना-1व इंसेट-3ए के जरिए इन स्वचालित मौसम का हाल बताने वाले संयत्रों से जानकारी एकत्रित करेगा। सागर विवि मे स्थापित संयत्र कल्पना उपग्रह के जरिए जानकारी इसरो व दिल्ली स्थित भारतीय मौसम विभाग के मुख्यालय को भेजेगा।
सागर मे स्थापित हुए इस मौसम सूचक संयत्र के फायदों के बारे मे श्री शांडिल्य ने बताया कि इससे विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं, किसानों व मौसम के हाल पर नजर रखने के इच्छुक आम लोगों को भी बुंदेलखण्ड के मौसम के बारे मे ताजा जानकारी हरदम उपलब्ध रहेगी। इस संयत्र द्वारा एकत्रित मौसम संबंधी जानकारी को इंटरनेट के माध्यम से कभी भी और कहीं से भी हासिल किया जा सकता है। इसके लिए इसरो की वेबसाईट पर जाकर सागर के इसरो केन्द्र का कोड इसरो-310 डालकर जानकारी ली जा सकती है।

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